अध्याय 13 बस एक बार देख लूं

“बस एक बार देख लूं” वाला भ्रम अपने दिमाग से निकाल दो:

  • बस एक बार देख लूं से ही तो शुरुआत हुई थी।

  • जब मुश्किल टाइम हो या कोई खास मौका हो, तब भी यही सोचते हैं - बस एक बार देख लूं। बस इसी से सारी मेहनत पानी में चली जाती है।

  • बस एक बार देख लूं ही है जो addiction तोड़ने के बाद भी हमें वापस trap में धकेल देता है। कभी-कभी तो सिर्फ ये confirm करने के लिए देखते हैं की अब porn की जरूरत नहीं है, और एक visit करके वही साबित हो जाता है।

Porn देखने के बाद के effects इतने horrible होते हैं की user सोचता है की अब कभी addict नहीं होगा - लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है। User सोचता है की जो चीज़ इतनी नफरत और शर्मिंदगी दे रही है, वो मुझसे ये सब कैसे करवा लेती है?’ पर करवा लेती है।

उस ‘एक special session’ का ख्याल ही अक्सर users को छोड़ने से रोकता है - लंबी conference trip के बाद, office में hard day के बाद, बच्चों से झगड़े के बाद, या जब partner ने sex के लिए मना कर दिया हो। एक बात कान खोल कर सुन लो - ‘बस एक बार देख लूं’ जैसा कुछ नहीं होता। ये एक chain reaction है जो जिंदगी भर चलेगी, जब तक तोड़ोगे नहीं। ‘special occasion’ का ये झूठ लोगों को छोड़ने के बाद भी खाए जाता है। ‘एक बार चलेगा’ वाली सोच को मार डालो - ये बस दिमाग का खेल है। जब भी porn का ख्याल आए, उसे ऐसे देखो - एक अंधेरी जिंदगी जहां screen के सामने बैठे-बैठे अपना दिमाग और शरीर दोनों बर्बाद कर रहे हो। एक कैदी की तरह, जिसके पास कोई आशा नहीं। हां, erection problems होना कोई जुर्म नहीं है। पर long-term happiness को short-term ‘pleasure’ के लिए कुर्बान करना ज़रूर एक जुर्म है।

चलो, मान लिया की हर खाली वक्त के लिए हमारे पास ‘कुछ करने को’ नहीं हो सकता। पूरी जिंदगी के हर पल का plan करना possible भी नहीं है। हां, बहुत कुछ plan कर सकते हैं, पर कभी-कभी ऐसे ही होता है। ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव तो आते ही रहेंगे, porn हो या ना हो। लेकिन एक बात दिमाग में बिठा लो - porn इसका solution नहीं है। दो ही रास्ते हैं - या तो जिंदगी भर की तकलीफ़, या फिर एकदम आज़ादी। बादाम और cyanide एक जैसा ही smell करते है, पर अगर तुमको बादाम पसंद है, तो तुम cyanide तो नहीं खालोगे। एक बार भी खाओ तो जान जा सकती है। तो फिर ‘एक बार तो चलता है’ वाली सोच से खुद को सज़ा क्यों दे रहे हो? जब किसी struggling user से पूछो, “काश तुम वापस जा सकते जब addiction नहीं थी, क्या फिर से शुरू करते?” जवाब हमेशा आता है: “पागल हो क्या!” लेकिन हर user के पास ये मौका रोज़ होता है, फिर भी क्यों नहीं छोड़ते? जवाब है - डर। डर इस बात का की वो छोड़ ही नहीं पाएगा, या फिर life porn के बिना पहले जैसी नहीं रहेगी।

अपने आप को बेवकूफ बनाना बंद करो! तुम porn छोड़ सकते हो, कोई भी छोड़ सकता है। ये बेहद आसान है, लेकिन इसे आसान बनाने के लिए कुछ basic बातें दिमाग में clear होनी चाहिए।

  1. खोना कुछ नहीं है, सिर्फ जबरदस्त positive फायदे पाने हैं।

  2. ये मत सोचो की ‘थोड़ा देख लूं’ या ‘एक बार से क्या होगा’। ये सब बेकार की बातें हैं। या तो पूरी आज़ादी, या फिर जिंदगी भर की गुलामी।

  3. तुम कोई special case नहीं हो; हर user आसानी से छोड़ सकता है, तुम भी छोड़ सकते हो।

बहुत से users मानते हैं की वो पक्के addicts हैं या उनकी personality ही addictive है। ये सोच आमतौर पर बहुत सारी shocking neuroscience पढ़ने के बाद आती है। पर ऐसा कुछ नहीं होता। कोई भी porn का addiction लेकर पैदा नहीं होता। addiction से पहले किसी को video clips की जरूरत नहीं थी। आपको नशे ने फंसाया है, आपकी personality या character ने नहीं। ये supernormal stimulus इतना शातिर है की आपको लगने लगता है - ‘हां, मैं addict ही हूं।’ पर इस सोच को तोड़ना बहुत ज़रूरी है। क्योंकि अगर आप मानते रहेंगे की आप addict हैं, तो आप addict बने रहेंगे - चाहे आपके शरीर का छोटा शैतान कब का मर चुका हो। इस तरह की सारी brainwashing को हटाना बेहद ज़रूरी है।