अध्याय 12 Cutting Down के झांसे में ना आएं
बहुत से users cutting down का सहारा लेते हैं, सोचते हैं की धीरे-धीरे छोड़ेंगे, या फिर छोटे शैतान को control करने की कोशिश करते हैं। कई लोग तो ‘porn diet’ को एक solution की तरह recommend करते हैं। लेकिन रुकने के लिए cutting down का use करना बिल्कुल गलत तरीका है। cutting down की कोशिश हमें जिंदगी भर के लिए trap में फंसा देती हैं। आम तौर पर ये cutting down की strategy तब आती है जब completely छोड़ने की कोशिश fail हो जाती है। कुछ घंटों या दिनों रुकने के बाद user सोचने लगता है:
“मैं अपने online कोठे को visit किए बिना सो नहीं सकता, इसलिए अब मैं बस चार दिन में एक बार porn देखूंगा, या फिर अपनी collection से ‘extreme content porn’ delete कर दूंगा। अगर मैं इस porn diet को follow कर पाया, तो या तो मैं इसी level पर रह लूंगा या फिर और भी कम कर दूंगा।”
इससे कुछ बहुत ही बुरी चीज़ें होती हैं:
वो situation situation में फंस जाते हैं - internet porn की addiction तो रहती ही है, और शैतान भी जिंदा रहता है, शरीर में भी और दिमाग में भी।
पूरी जिंदगी अगले session का wait करते हुए waste हो जाती है।
Cutting down से पहले, browser खोल लेते थे और withdrawal से राहत मिल जाती थी। अब क्या है की normal life की tension के साथ-साथ withdrawal के दर्द से भी गुज़रना पड़ता है। इससे mood और भी ख़राब रहता है, चिड़चिड़ापन और बढ़ जाता है।
जब regular इस्तेमाल करते थे, तो न कोई खास मज़ा आता था, न ही समझ में आता था की ये एक supernormal stimulus है। बस automatic चलता रहता था। enjoyment सिर्फ तब होता था जब कुछ दिन gap के बाद देखते थे। अब जब वो हर session के लिए extra time wait करते हैं, तो ‘enjoyment’ feel होता है। जितना ज्यादा wait करते हैं, उतना ही ज्यादा ‘enjoyable’ हर session लगने लगता है। लेकिन असली बात ये है की session में ‘enjoyment’ असल में session से नहीं आता - वो बस craving की बेचैनी को खत्म करने से आता है, चाहे वो physical हो या mental. जितनी ज्यादा तड़प, उतना ज्यादा ‘मज़ा’ लगता है।
Porn छोड़ने में सबसे बड़ी problem neurological addiction नहीं है, वो तो आसान है। Users कई मौकों पर बिना किसी दिक्कत के रुक जाते हैं - जैसे किसी close person की death हो जाए, family में कोई problem हो, या फिर work की tension हो। वो दस दिन भी बिना porn के निकाल लेते हैं और कोई tension नहीं होती। लेकिन वही दस दिन अगर ऐसे हों जहां porn available हो, तो वो परेशान हो जाते हैं। बस यही सोचते रहते हैं की कब देखें, कैसे देखें।
कई users काम के दौरान मौका मिले तो भी नहीं देखते, Victoria’s Secret के सामने से गुज़रें या swimming pool पर जाएं, तो भी कोई tension नहीं होती। घर में कोई मेहमान आ जाए और couch पर सोना पड़े, या खुद बाहर guest बनकर जाएं, तब भी manage कर लेते हैं। Dance bar में जाएं या Goa के beach पर जहां लोग bikini में हों, तब भी कोई पागलपन नहीं करते। उल्टा, users को राहत महसूस होती है जब कोई situation उन्हें porn देखने से रोक देती है। असल में, जो users छोड़ना चाहते हैं, उन्हें एक अजीब सी खुशी मिलती है लंबे time तक control करने में। सोचते हैं की शायद एक दिन पूरी तरह छोड़ने में कामयाब हो जाएंगे।
जब आप porn छोड़ने की सोचते हैं, तो real problem addiction नहीं है। Real problem है brainwashing - वो गलतफहमी की ‘ये तो मेरा हक़ है’, ‘ये तो मेरा reward है’। बस यही सोचते रहते हैं की इसके बिना life में मज़ा नहीं आएगा। और फिर ये cutting down का चक्कर क्या करता है? Porn से दूर करने की बजाय, आपको और कमज़ोर बना देता है। आप बस यही सोचते रहते हैं - ’अरे वो नई clip मिस हो गई, कैसे रह पाऊंगा बिना देखे, life में खुशी कैसे आएगी।
सबसे बुरी हालत किसकी होती है? वो user जो सोचता है की धीरे-धीरे कम करके छोड़ देगा। उसे लगता है की कम देखेगा तो कम याद आएगी। पर सच्चाई एकदम उल्टी है - जितना कम देखो, उतनी ज्यादा तड़प बढ़ती है, और फिर जब देखते हो तो उतना ही ज्यादा ‘relief’ लगता है। धीरे-धीरे उनकी favourite category भी वो kick नहीं देती। इसीलिये सारी tube sites अलग-अलग star की, अलग-अलग type की videos होती, ताकि लोग बार-बार आएं।
मानने में मुश्किल हो रहा है? चलो एक बात बताओ - सबसे ज्यादा control कब टूटता है? चार दिन रुकने के बाद। और four-day porn diet वाले के लिए सबसे special moment कौन सा होता है? वही चार दिन वाला moment! अब खुद से पूछो - क्या सच में pleasure के लिए कर रहे हो? या फिर सच्चाई ये है की withdrawal की बेचैनी से छुटकारा चाहते हो, वो भी इस गलतफहमी में की ये तुम्हारा हक़ है?
सबसे ज़रूरी है brainwashing को मिटाना, last session से पहले, दिमाग से सारी गलत धारणाएं निकालनी हैं। अगर browser बंद करने से पहले ये realize नहीं करोगे की इसमें कोई enjoyment नहीं है, तो बाद में फिर से porn के trap में फंस जाओगे। जब bookmarks और saved pictures देखते हो, तो खुद से पूछो - इसमें ऐसा क्या खास है? हो सकता है आपको लगता हो की कुछ specific clips बेहतर हैं, जो आपके favourite genre या favourite category की हैं। अगर ऐसा है, तो दूसरी videos और themes क्यों देखते हो? कौन अपनी आदत की वजह से अपने दिमाग को mess up करेगा? एक महीने बाद भी जिंदगी वैसी ही रहती है, तो कोई porn clip कैसे special हो सकती है?
खुद test कर के देख लो। पिछले महीने की वो hot clip ढूंढो जो लगता था special है। फिर एक reminder set करो और एक month बिना porn के रहने के बाद वही clip देखो। वो almost वैसी ही feeling देगी जैसी पिछले महीने दी थी। लेकिन इंटरेस्टिंग क्या है? वही clip बिल्कुल अलग effect करेगी अगर आप किसी party से आए हों जहां कोई potential partner ने मना कर दिया हो या कोई rejection face करना पड़ा हो। क्यों? क्योंकि जब तक छोटा शैतान (craving) satisfied नहीं होता, एक addict कभी पूरी तरह खुश नहीं रह सकता।
Satisfaction कहां से आएगी? असली बात ये है की जब withdrawal की बेचैनी दूर नहीं कर पाते तो टेंशन में रहते हैं। सोचो, क्या फर्क है porn देखने और ना देखने में? बस यही ना की या तो राहत महसूस होगी या फिर बेचैनी। इसीलिए लगता है की internet porn ज़रूरी है। और जो लोग सुबह उठते ही पहला काम porn देखना करते हैं, उनका क्या? चाहे देखें या ना देखें, दोनों तरह से परेशान ही रहते हैं।
cutting down वाला formula ना सिर्फ बेकार है, ये तो खुद को सज़ा देने जैसा है। क्योंकि शुरू में user सोचता है की धीरे-धीरे habit कम करके porn देखने की इच्छा कम हो जाएगी। पर ये habit नहीं है, ये addiction है। और किसी भी addiction की nature होती है - कम नहीं, ज्यादा चाहना। इसलिए cutting down के लिए user को जिंदगी भर willpower और discipline use करना पड़ेगा। मतलब cutting down का मतलब है - lifetime की सज़ा। एकदम छोड़ देना कहीं ज्यादा आसान और कम painful है। हज़ारों cases हैं जहां cutting down fail हुआ है।
Porn छोड़ने में असली problem dopamine addiction नहीं है, उससे तो deal किया जा सकता है। असली problem है वो गलत belief की porn से pleasure मिलता है। ये सोच कहां से आई? पहले तो society की brainwashing से, फिर addiction ने इस सोच को और मज़बूत कर दिया। Cutting down करने से क्या होता है? ये गलत सोच और भी strong हो जाती है। यहां तक की porn पूरी life को control करने लगती है। User को लगने लगता है की दुनिया में सबसे कीमती चीज़ उसकी addiction है।
कुछ cases में लोग succeed हुए हैं - पहले थोड़ा कम करते हैं, फिर एक दिन एकदम से बंद। लेकिन ये लोग cutting down की वजह से नहीं, cutting down के बावजूद छूट पाए हैं। cutting down ने तो बस तकलीफ बढ़ाई। हर बार fail होने पर क्या होता है? बंदा और टूट जाता है, और उसे पक्का लगने लगता है की अब ये नशा जिंदगी भर नहीं छूटेगा। नतीजा क्या होता है? या तो सीधा वापस अपनी online library में जाता है pleasure और support के लिए, या फिर कुछ दिन रुक कर दोबारा वही चक्कर। आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों।
एक फायदा cutting down का ज़रूर है - साफ दिखा देता है की porn कितना खोखला है। समझो ऐसे - कुछ दिन रुको, फिर देखो, कोई खास feeling नहीं आती। पहले तड़पना पड़ता है, बेचैनी झेलनी पड़ती है, तब जाकर कहीं राहत मिलती है। तो अब choices क्या हैं:
पूरी life cutting down करो और खुद को torture करते रहो - जो तुम वैसे भी कर नहीं पाओगे।
जिंदगी भर खुद को बढ़ता हुआ torture देते रहो - जिसका कोई मतलब नहीं है।
अपने आप पर थोड़ी दया करो, एक झटके में porn को छोड़ दो।
Cutting down से एक और सच्चाई पता चलती है - ये नहीं हो सकता की ‘बस कभी-कभार देख लूंगा’। Internet porn एक ऐसी चेन है जो टूटेगी नहीं, जब तक आप खुद इसे तोड़ने की ठान नहीं लेते।
एक बात दिमाग में रखो: Cutting down आपको डुबो देगा।