अध्याय 6 Brainwashing के पीछे की कहानी
Porn का महा-शैतान कई चीज़ों से मिलकर बनता है - समाज का pressure, media का दिखावा, दोस्तों का असर और user की अपनी सोच। सिर्फ willpower से कुछ नहीं होगा क्योंकि जब तक ये सारी गलत beliefs तुम्हारे दिमाग में हैं, तब तक लगेगा कि कुछ miss कर रहे हो और फिर से फंस जाओगे। Success के लिए ये जरूरी है कि porn की imaginary value को तोड़ें और समझें कि कैसे life का बंटाधार हो रहा है!
brainwashing और डर का कनेक्शन समझो। Future में withdrawal के झटके आएंगे इस डर से ही वो झटके आते हैं। असली झटका डर ही है। याद करो जब withdrawal symptoms हुए थे - हाथ पसीजना, सांस फूलना, नींद उड़ जाना और दिमाग काम न करना। अब वैसी ही दूसरी situations के बारे में सोचो: job interview, किसी hot लड़की/लड़के के सामने नर्वस होना, public speaking वगैरह। ये वही anxiety वाली feelings हैं जो डर से आती हैं। सीधा हिसाब लगाओ - कोई नशा महीनों बाद भी कैसे पकड़े रख सकता है? ये तो दिमाग का खेल है, right?
6.1 Stress
सिर्फ बड़े दुख ही नहीं, छोटी stress भी users को उस ‘unsafe’ zone में धकेल देती हैं जहां वो पहले कभी नहीं जाता था।। Stress कई तरह का होता है - socializing, phone calls, बच्चों वाली housewife की टेंशन, और भी न जाने क्या-क्या। phone calls को ही देख लो, खासकर business वालों के लिए। कौन सा customer खुश होकर call करता है, या boss appreciation के लिए phone करता है? कुछ न कुछ झमेला तो होता ही है। फिर घर आओ तो वहां normal scene - बच्चे रो रहे हैं, partner को attention चाहिए। इस टाइम अगर user पहले से ही नहीं देख रहा है, तो रात को मिलने वाली porn की relief के बारे में सोचने लगता है। अपनेअप withdrawal के झटके लगते हैं, stress handle करने की capacity कम हो जाती है और नई tensions के लिए तैयार नहीं रहते। जब withdrawal और normal stress दोनों थोड़े-थोड़े कम होते हैं, तो temporary relief मिलती है। ये relief real होती है, user को सच में better feel होता है, लेकिन non-user से ज्यादा stressed तो रहता ही है।
ये next example तुम्हें shock करने के लिए नहीं है - EasyPeasy में ऐसा कोई drama नहीं है - बस ये समझाने के लिए है कि porn तुम्हारे nerves को relax नहीं करती, बल्कि destroy करती है।
एक scene सोचो - तुम वो stage तक पहुंच गए हो जहां एक attractive और hot partner के साथ भी turn on नहीं हो पा रहे। एक minute रुको और सोचो एक ऐसी life जहां एक सुंदर और charming इंसान को तुम्हारे दिमाग के कोठे में बसी virtual porn stars से compete करना पड़े और फिर भी fail हो जाए। सोचो उस बंदे की mental state के बारे में जो ये warning मिलने के बाद भी use करता रहता है और इस charming और willing partner के साथ real sex किए बिना ही मर जाता है। इन लोगों को weirdo कह के ignore करना आसान है, पर ये सच्ची कहानियां हैं - porn का नशा तुम्हारे दिमाग के साथ यही करता है। जितनी life आगे बढ़ती है, उतनी ही confidence खत्म होता जाता है और तुम ये सोचने लगते हो कि porn तुम्हारी help कर रही है, जबकि हो इसका उल्टा रहा होता है।
कभी अचानक से WiFi बंद हो जाए या slow चलने लगे तो panic आई है? Non-users को ये feeling नहीं होती, क्योंकि ये panic तो internet porn की वजह से होती है। Time के साथ ये तुम्हारी हिम्मत और confidence को खत्म करती जाती है। DeltaFosB तुम्हारे दिमाग में nural water slides बना देता है, जिस पर एक बार फिसले तो रुकना मुश्किल हो जाता है। और धीरे-धीरे ‘ना’ कहने की power खत्म हो जाती है। और जब कोई sexually पूरी तरह खोखला हो जाता है, तब user सोचने लगता है कि porn ही उसका real partner है और इसके बिना life जी ही नहीं सकता।
Internet porn तुम्हारे nerves को relax नहीं कर रही, धीरे-धीरे destroy कर रही है।. एक बार इस चक्कर से बाहर निकलो, तो देखो कैसे तुम्हारा natural confidence और self-confidence वापस आता है।
अपने आप को इस बात पर judge करने की जरूरत नहीं कि तुम partner को कितना satisfy कर सकते हो - ये कोई freedom नहीं है। लेकिन ये आजादी तब नहीं मिलेगी जब तुम वही पुरानी water slide पर बार-बार फिसलते रहो, और same destructive behaviour को repeat करके अपनी happiness और libido को नुकसान पहुंचाते रहो।
6.2 बोरियत
तुम भी उन लोगों में से हो क्या जो बिस्तर पर पहुंचते ही porn site खोल लेते हैं? इतनी habit हो गई है कि याद भी नहीं रहता कब से ये daily routine बन गया। बस automatic हो गया है। और ये जो सोचते हो कि porn से time-pass हो जाता है, ये एक धोखा है। बोरियत दिमाग का खेल है जो तब होता है जब या तो तुम बहुत time नहीं देखा, या फिर use कम करने की कोशिश कर रहे हो।
असल में होता क्या है - जब तुम porn की इस special power के addict हो जाते हो और फिर रुकने की कोशिश करते हो, तो ऐसा लगता है जैसे life में कुछ missing है। हां, अगर कोई मजेदार काम हो जो दिमाग busy रखे, तो तुम काफी time तक बिना इसके रह सकते हो। पर जब बोर हो तो दिमाग को भटकाने के लिए कुछ नहीं होता, तो फिर तुम दिमाग के शैतान को खाना खिला देते हो। और जब तुम इसे use कर रहे हो, न रोकना है न कम करना है, तो incognito mode on करना भी automatic हो जाता है। ये पूरा process इतना automatic है कि अगर तुमसे पिछले हफ्ते के sessions के बारे में पूछो, तो सिर्फ दो-एक ही याद आएंगे - या तो last वाला या फिर लंबे gap के बाद वाला।
असली बात ये है कि porn तुम्हें और ज्यादा bore करती है, सीधे नहीं तो घुमा के। क्योंकि finish होने के बाद तुम एकदम lazy हो जाते हो। फिर कोई active काम करने की बजाय, बस लेटे रहते हो, बोर होते हो और withdrawal के झटके को दूर करते रहते हो। इस brainwashing को समझना important है क्योंकि users boring time में porn देखते हैं, हमारा दिमाग programme हो जाता है कि porn interesting है। बिल्कुल ऐसे ही हम ये भी मान बैठे हैं कि sex - चाहे जैसा भी हो - हमें relax करता है। देखो कैसे couples जब sad हों या tension में हों तो sex करना चाहते हैं। पर जब सिर्फ orgasm पर focus करते हैं तो क्या होता है? बस होते ही एक-दूसरे से दूर भागने का मन करता है। अगर बस एक-दूसरे को hug किया होता, बात की होती या cuddle करके सो गए होते, तो ज्यादा relief मिलती।
6.3 Concentration
Masturbation और sex concentration में help नहीं करते - जब तुम concentrate करने की कोशिश कर रहे होते हो तो automatically distractions से बचते हो।फिर भी, जब user को concentrate करना होता है, तो बिना सोचे-समझे browser खोल लेते हो, दिमाग के छोटे शैतान को dopamine का खाना खिला देते हो और craving को थोड़ा शांत कर देते हो। फिर काम में लग जाते हो, भूल भी जाते हो कि अभी-अभी porn देख रहे थे। पर सालों तक dopamine की बाढ़ से दिमाग में ऐसे changes हो जाते हैं कि याददाश्त कमजोर हो जाती है, प्लानिंग नहीं कर पाते और अपने आप को control करना मुश्किल हो जाता है।
और फिर क्या होता है? अगली बार के लिए तुम्हें कुछ नया चाहिए होता है क्योंकि पुरानी clips से अब अब उतना dopamine और opioids नहीं मिलता। तो तुम्हें internet की गंदी sites और categories में घूमना पड़ेगा नई clips के लिए, और उस लक्ष्मण रेखा को cross करने की तरफ खिंचते रहोगे जहां shocking material है। इससे और stress बढ़ता है और finish होने के बाद भी असंतुष्ट feel करते हो।
Concentration पर और बुरा effect होता है क्योंकि dopamine के बड़े surges की वजह से receptors कम हो जाते हैं, फिर normal खुशियों से जो थोड़ी-बहुत dopamine मिलती है, वो भी feel नहीं होती। अच्छी बात ये है कि जैसे-जैसे ये cycle टूटेगा, तुम्हारा concentration और motivation वापस आएगा। बहुत लोगों के लिए यही concentration वाला पार्ट willpower method से फेल करा देता है: वो चिड़चिड़ापन और खराब mood तो झेल लेते हैं, लेकिन जब उनका सहारा छिन जाता है और कोई tough काम करना हो, तो काम पर focus न कर पाना उन्हें तोड़ देता है।
जब users छोड़ने की कोशिश करते हैं तो concentration की जो कमी होती है, वो sex या porn की कमी की वजह से नहीं होती। जब तुम किसी चीज़ के addict हो तो mental block आते हैं और जब mental block आता है तो क्या करते हो? Browser खोल लेते हो - जो block को ठीक नहीं करता - तो फिर? फिर वही करना पड़ता है जो बाकी normal लोग करते हैं - काम पर focus करो।
जब तुम user होते हो तब कभी असली वजह को blame नहीं करते: users कभी नहीं मानते कि उन्हें sexual problem है, बस कहते हैं कि थोड़ा off day है। लेकिन जैसे ही छोड़ने की कोशिश करते हो, हर गलत चीज़ का blame छोड़ने पर आ जाता है - “छोड़ा इसलिए ऐसा हो रहा है।” अब जब दिमाग काम नहीं करता, तो सीधा काम करने की बजाय तुम सोचते हो “बस एक बार porn देख लूं, सब ठीक हो जाएगा”। फिर तुम अपने छोड़ने के decision पर doubt करने लगते हो और इस गुलामी से आज़ाद होने का इरादा टूट जाता है।
अगर तुम्हें लगता है कि porn सच में concentration में help करता है, तो इसके बारे में tension लेना guarantee है कि तुम concentrate नहीं कर पाओगे। Problem physical withdrawal के झटके से नहीं, बल्कि वो शक है जो तुम्हारे दिमाग में घुस गया है। याद रखो, झटके सिर्फ user को होते हैं, non-users की लाइफ एकदम chill है।
6.4 Relaxation
ज्यादातर users सोचते हैं कि porn उन्हें relax करने में help करती है, पर ऐसा है नहीं। सोचो जरा, इंटरनेट की गंदी गलियों में पागलों की तरह कुछ नया ढूंढना और अपने आप से लड़ते रहना कि कहां तक जाना है - क्या ये कोई relaxing वाली बात लगती है?
नई जगह घूमकर या लंबे दिन के बाद जब रात को आराम से बैठते हैं, खाना-पीना करते हैं, तो कैसा मस्त फील होता है। पर porn देखने वाले को चैन कहां? क्योंकि उसे एक और भूख मिटानी होती है। Users सोचते हैं कि porn जलेबी पे रबड़ी की तरह extra मजा है, पर असल में ये वो ‘छोटा शैतान’ है जिसे dopamine चाहिए। सच्चाई ये है कि addict कभी पूरी तरह relax नहीं हो सकता और जैसे-जैसे life चलती है, ये problem double-tripple होती जाती है। एक ex-user का online comment देखो:
“मैं पक्का मानता था कि मेरे अंदर कोई बुरी आत्मा है। अब समझ आता है कि हां, कुछ था तो सही, पर वो मेरी personality का दोष नहीं था, वो तो internet porn की बुरी आत्मा थी जो मेरी लाइफ का भर्ता बना रही थी। उस टाइम लगता था कि दुनिया का हर दुख मुझे मिला है, पर अब सोचता हूं तो हैरान होता हूं कि इतनी टेंशन थी कहां। बाकी हर चीज़ में मैं अपनी life control करता था, बस एक ये नशा था जिसने मुझे कठपुतली बना रखा था। और सबसे दुख की बात ये है कि आज भी मैं अपने बच्चों को यकीन नहीं दिला पाता कि मैं इतना गुस्सैल इस नशे की गुलामी की वजह से था”
हर बार जब मैं porn addicts को अपनी लत justify करते सुनता हूं कि “यार इससे stress कम होता है।” एक single dad के online post याद आता हेै, जिसका छह साल का बेटा डरावनी movie देखने के बाद रात को उसके साथ सोना चाहता था, लेकिन बाप मना कर देता था ताकि वो अपना porn देख सके। और घंटों edge करे।
एक और smoking वाली story सुनो। कुछ साल पहले adoption agencies ने cigarette पीने वालों को बच्चे adopt करने से मना कर दीया। एक बंदे ने उन्हें phone करके बताया, “तुम लोग एकदम गलत हो। मैं बचपन में mommy से कोई serious बात करने के लीये उन्के cigarette पीने का wait करता था, क्योंकि तब वो शांत रहती थी।” अब सोचो, वो अपनी मां से normal टाइम पे बात क्यों नहीं कर सकता था?
क्यों कुछ लोग real sex के बाद भी पागलों की तरह तड़पते रहते हैं जब तक porn न देख लें? एक बंदे की story पढ़ो - advertising business में था, एकदम hot, ten-on-ten baddie लड़कियों को date पे जाने का ऑप्शन था। पर उसने क्या किया? उन्हें dinner पे ले जाना ही बंद कर दिया। क्यों? क्योंकि porn एकदम easy option थी - न पैसे खर्च करो, न रात को किसी के ‘ना’ बोलने का डर। क्यों परेशान हो जब घर पहुंचते ही उसका छोटा शैतान उसे एक ऐसे game की तरफ खींच रहा हो जहां risk कम है और reward पक्का है?
फिर non-users इतने relaxed क्यों रहते हैं? और Users एक-दो दिन भी बिना porn के शांत क्यों नहीं बैठ पाते? किसी user का experience पढ़ो जो quit करने की कसम खाता है, देखो कैसे temptations से जूझता है: बिल्कुल भी relaxed नहीं होता जब उसे वो ‘एकमात्र pleasure’ नहीं मिलता जिसका वो खुद को ‘हकदार’ समझता है। वो भूल चुका होता है कि पूरी तरह relaxed होना कैसा feel होता है। Porn बिल्कुल उस pitcher-plant की तरह है जिसमें मक्खी फंसती है - शुरू में मक्खी रस पीती है, पर किसी अनजाने पल पौधा मक्खी को खाना शुरू कर देता है।
क्या अब वक्त नहीं आ गया इस pitcher-plant से बाहर निकलने का?
6.5 Energy
ज्यादातर users जानते हैं कि porn में नई-नई clips, categories, और extreme चीज़ों की तलाश उनके दिमाग के reward और sexual system को कैसे affect करती है। लेकिन उन्हें नहीं पता कि ये उनकी energy को कैसे खत्म करती है।
Porn के trap की सबसे खतरनाक बात ये है कि इसका असर, चाहे physical हो या mental, इतना धीरे-धीरे होता है कि हमें पता ही नहीं चलता। हम withdrawal को normal समझने लगते हैं। ये बिल्कुल गलत eating habits जैसा है: हम मोटे लोगों को देखकर सोचते हैं “अरे यार, अपना ख्याल क्यों नहीं रखते?” पर एक सेकंड सोचो, अगर ये सब एक रात में हो जाए - शाम को सोए एकदम fit, six-pack abs के साथ - और सुबह उठो तो पेट बाहर, शरीर ढीला-ढाला और मोटा-थुलथुल। पूरी नींद लेकर energetic उठने की जगह, तुम miserable और सुस्त feel करते हो, आंखें भी मुश्किल से खुल रही हैं।
तुम्हारी हालत क्या होगी? सोचोगे कि रात में कौन सी बीमारी लग गई। जबकि बीमारी तो वही है। इसमें बीस साल लगे या एक रात, फर्क क्या पड़ता है? Porn के साथ भी यही है: काश possible होता कि तुम आज के अपने आप को और porn छोड़े हुए सिर्फ तीन हफ्ते के बाद के अपने आप को compare कर पाते, बस इतना ही काफी होता तुम्हें convince करने के लिए। तुम हैरान होकर सोचते, क्या जिंदगी इतनी मस्त हो सकती है? या सच में, “क्या मैं इतना डूब गया था?” सिर्फ सेहत ही नहीं, पूरी energy लौट आती, confidence तो एकदम छत छू रहा होता और दिमाग भी rocket की speed से दौड़ रहा होता।
Energy की कमी, थकान और इससे जुड़ी हर चीज़ को ‘उम्र का असर’ कहकर छुपा दिया जाता है। दोस्त और colleagues जो खुद भी सुस्त lifestyle जीते हैं, इस behaviour को और normal बना देते हैं। अब देखो कैसी बकवास सोच बन गई है - जैसे जोश-जवानी सिर्फ school-college वालों के लिए है, और बीस की उम्र में ही बुड़्ढा हो जाओ। ये भी brainwashing का एक symptom है। और dopamine की sensitivity खत्म होने के चलते खाने-पीने और exercise सब भूल गए हो।
Porn छोड़ने के थोड़े time बाद ही वो धुंधलापन और भारीपन खत्म हो जाएगा। बात ये है कि porn से तुम हमेशा अपनी energy खर्च कर रहे हो और इस process में अपने limbic system की chemistry के साथ छेड़छाड़ कर रहे हो। Smoking छोड़ने की तरह नहीं है ये, जहां physical और mental health धीरे-धीरे ठीक होती है। Porn छोड़ने से पहले दिन से ही जबरदस्त results मिलते हैं। ‘छोटे शैतान’ को मारने और दिमाग के नशे की water slide को बंद करने में थोड़ा time लगेगा, पर reward centre का ठीक होना उतना slow नहीं जितना धीरे-धीरे तुम इस गड्ढे में गिरे थे। पर अगर तुम willpower से लड़ रहे हो, तो depression इतनी होगी कि health और energy का फायदा feel ही नहीं होगा। काश EasyPeasy तुम्हें तीन हफ्ते आगे की झलक दिखा सकता, पर तुम खुद कर सकते हो ये magic! तुम्हारा दिल जानता है कि ये सब सच है, बस एक काम करो — अपनी imagination का use करो!
6.6 Social Night से पहले वाला Session
ये एक गलतफहमी है जो सही लगती है, पर है नहीं। क्या तुम अपनी भूख control करने के लिए restaurant या party जाने से पहले घर पे खाना खा लेते हो? बिल्कुल वही तुम social nights से पहले कर रहे हो - porn देख के थक जाते हो और अपने best mood में नहीं रह पाते। आजकल ये लड़की/लड़का पटाने का game चल पड़ा है, हर किसी को लगता है कि कोई ना कोई hook-up या one night stand तो score करना ही है। अपनी nervousness को porn से दबाने की कोशिश long run में problem को और बढ़ा देगी। मैं personally थोड़ी anxiety पसंद करता हूं, इससे focused और engaged रहता हूं। Orgasm से खुद को mentally और physically थका देना कोई help नहीं करेगा।
Social night में porn का चक्कर दो-तीन वजहों से होता है - pleasure की तलब और सहारे की जरूरत। Social events में भी एक तरफ stress होती है, एक तरफ मजा भी आता है। ये contradictory लग सकता है पर कोई भी socializing stressful हो सकती है - चाहे दोस्तों के साथ ही क्यों न हो - क्योंकि तुम natural रहना चाहते हो और पूरी तरह relaxed भी। कई ऐसे मौके होते हैं जहां एक साथ कई factors काम करते हैं। जैसे driving को ही ले लो - आखिर जान का सवाल है। Stressful भी है, और लंबे time तक concentration भी चाहिए। तुम्हें ये सब consciously पता होना जरूरी नहीं, तुम्हारा दिमाग subconsciously आप समझ लेता है। इसी तरह, जब traffic jam में फंसे हो या long highway drives पर bore हो रहे हो, तो दिमाग में घर पहुंचकर session मारने का ख्याल घूमने लगता है।
First date का scene ही देख लो - मिलने से पहले दिमाग में हजार सवाल: कैसी/कैसा होगा? कुछ होगा? फिर अगर real में मिलने पर enthusiasm कम होने लगे तो तुम ज्यादा ही relaxed feel करने लगते हो, फिर guilty feel करते हो कि ऐसा क्यों सोच रहे हो। एक खींचतान शुरू हो जाती है, “या तो sex चाहिए या या फिर बहाना बनाकर निकल लूं”, और ये सोच तुम्हें date खत्म होते ही porn की तरफ धकेल देती है।
और चाहे date अच्छी गई हो और कुछ घंटों बाद उनके साथ private time भी मिल जाए, कुछ भी हो जाए तुम satisfy नहीं होगे अगर सिर्फ orgasm ही target है। और अगर अकेले घर लौट रहे हो, तो अपनी कोशिशों पर proud होने की बजाय दिमाग में सिर्फ एक ही thought - घर जाकर porn देखूंगा। guaranteed, ऐसे में घर पहुंचते ही laptop on। और अक्सर ऐसी रातों के बाद - जब सुबह उठो तो एक अजीब सा खालीपन feel हो - यही वो sessions होते हैं जो सबसे ज्यादा याद आएंगे जब porn छोड़ने की सोचोगे। हमें लगता है कि life में अब उतना मजा कभी नहीं आएगा। असल में, game यही है: ये sessions बस withdrawal के झटके को शांत करते हैं, कभी ज्यादा चाहिए कभी कम, और अगली बार के लिए water slide से फिसलना और आसान हो जाता है।
भाई एक बात दिमाग में बिठा लो - खास वो porn की दुनिया या online कोथा नहीं है, खास तो वो real life के मौके हैं। एक बार इस लत से पीछा छूटे, तो जिंदगी के वही पल और भी enjoyable हो जाएंगे और stressful situations कम stressful लगेंगे।