अध्याय 3 छोड़ना इतना मुश्किल क्यों है?

हर user को लगता है जैसे किसी भूत ने उन्हें जकड़ लिया है। शुरुआत में बस यही सोचते हैं कि “मैं छोड़ूंगा, बस आज नहीं”। धीरे-धीरे हम ये मानने लगते हैं कि हमारे पास इतनी willpower नहीं है, या कि porn में कुछ ऐसा है जो life enjoy करने के लिए जरूरी है। Porn addiction एक फिसलनी वाले गड्ढे से निकलने जैसा है: जैसे ही ऊपर पहुंचते हैं और धूप दिखती है, mood खराब होता है और हम फिर नीचे फिसल जाते हैं। फिर वही browser खुलता है, और जब masturbate करते समय ही गंदा feel होता है।

किसी user से पूछो, “अगर टाइम मशीन मिल जाए और तू वापस उस टाइम में जा सके जब तू इस दलदल में नहीं फंसा था, और तेरे पास आज की अक्ल भी हो, तो क्या तू फिर से porn का पहला scene देखता?”

“भूल कर भी नहीं!” यही जवाब मिलेगा।

अब उस बंदे से पूछ जो porn का शेर बनता है, जो बोलता है कि इससे कोई नुकसान नहीं होता, न दिमाग का न dopamine का: “तो क्या तू अपने बच्चों को बोलेगा की हां बेटा, porn देखो, मजे करो?”

“मां कसम, कभी नहीं!” फिर वही जवाब।

Porn एक अजीब पहेली है। मुश्किल ये नहीं समझाना कि छोड़ना आसान क्यों है, मुश्किल ये समझाना है कि लोग इसे छोड़ क्यों नहीं पाते। असल में समझ में नहीं आता कि दिमाग को होने वाले नुकसान (neurological damage) के बारे में जानने के बाद भी लोग इसे क्यों करते हैं। हम शुरू इसलिए करते हैं क्योंकि करोड़ों लोग पहले से कर रहे हैं, लेकिन ये सारे लोग चाहते हैं काश उन्होंने शुरू ही न किया होता, कहते हैं कि ये तो जैसे auto में clutch अटका के चलाना है। हम यकीन नहीं करते कि इनको मजा नहीं आ रहा, क्योंकि हमें लगता है कि ये freedom है या ‘sex education’ है, और खुद भी इस नशे में डूबने इसके आदी बनने की कोशिश करते हैं। फिर बाकी की जिंदगी दूसरों को मना करते हुए और खुद छोड़ने की कोशिश करते हुए गुजारते हैं, और सोचते हैं कि सिर्फ हमारे साथ ही ऐसा हो रहा है।

हम अपना काफी वक्त निराश और रोते-धोते बर्बाद करते हैं। इस supernormal चीज़ से अपने को ‘educate’ करते-करते हम कंप्यूटर की ठंडी स्क्रीन के भूखे हो जाते हैं, चाहे असली दुनिया में कितना भी अच्छा मौका क्यों न हो। PMO से dopamine का जो चढ़ना-उतरना चलता रहता है, उससे हम खुद को एक ऐसी जिंदगी की सजा दे देते हैं जिसमें अकेलापन, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, टेंशन, थकान और sex life की बर्बादी। Porn में sex और connection के सबसे अच्छे parts होते ही नहीं हैं, और आखिर में बस guilt और शर्मिंदगी बचती है।

असल में, इंटरनेट porn की लत और इसके नुकसान के बारे में यहां और दूसरी sites पर पढ़कर हम और भी ज्यादा nervous और hopeless हो जाते हैं! कैसी hobby है ये कि जब कर रहे हो तो लगता है काश न कर रहे होते, और जब नहीं कर रहे तो करने की तड़प होती है? Users खुद से नफरत करते हैं जब hypofrontality और desensitisation के बारे में पढ़ते हैं, हर अपने loving partner की पीछे porn देखते हैं, और जब दिन में session के बाद gym करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। एक समझदार और rational इंसान अपने आप को गालियां देता है, कोसते है। लेकिन सबसे बुरी बात - इस जहर को पीते रहने से users को मिलता क्या है? कुछ भी नहीं!

तुम सोच रहे होगे “हां यार, ये सब तो पता है, लेकिन एक बार इसकी लत लग जाए तो छोड़ना बहुत मुश्किल है।” लेकिन ये इतना मुश्किल क्यों है? कुछ लोग कहते हैं कि withdrawal symptoms बहुत strong होते हैं, लेकिन जैसा कि तुम जल्द ही जानोगे, असल में withdrawal symptoms बहुत हल्के होते हैं। और ये इस बात से साफ है कि बहुत से PMO करने वाले जिए और मर गए, उन्हें ये भी नहीं पता चला कि वो addict थे।

कुछ लोग कहते हैं कि internet porn free है तो इस प्रकृति के वरदान का फायदा क्यों न उठाया जाए, लेकिन ये बकवास है - ये उतना ही खतरनाक नशा है जितनी कोई drug। जो लोग कसमें खाते हैं कि वो सिर्फ ‘erotica’ जैसे Playboy magazines ही देखते हैं, उनसे पूछो कि क्या कभी ‘unsafe porn’ की लाइन क्रॉस नहीं की। और अगर सच बोलें तो मानेंगे कि कई बार खुद को बहाने देकर कैसी-कैसी चीजें देख डाली, पर बिना देखे रह नहीं पाए।

इसका मज़े से कोई लेना-देना नहीं है। जैसे मुझे बिरयानी बहुत पसंद है, लेकिन ऐसा तो नहीं कि रोज नहीं खाई तो जान निकल जाएगी। बाकी चीजों में क्या होता है - जब खा रहे हैं तब मजा आया, कोई दीवार से सिर नहीं मारता कि हाय, आज बिरयानी नहीं मिली।

कुछ लोग कहते हैं: “भाई, educational है!“ अच्छा? तो बता कैसे तू बेहतर इंसान बन गया? “इससे sex का satisfaction मिलता है!” तो फिर क्यों अकेला पड़ जाता है और कभी न मिटने वाली भूख लगी रहती है? “इससे release मिलती है!” क्या? Real life के tension से? हां, एक घंटे के लिए, उसके बाद दोगुना वापस आ जाता है। और कौन सा tension solve हुआ तेरा? “नींद आ जाती है इससे” अबे तो बाकी दुनिया कैसे सोती है बे?? नींद ठीक करने के bhaut scientific तरीके है, और list लंबी है।

बहुत लोग सोचते हैं कि porn से बोरियत दूर जाती है, लेकिन भाई बोरियत दिमाग का खेल है। Porn तुम्हें जल्द ही नई-नई चीज़ों का भूखा बना देगी,कि तू हर वक्त कुछ नया देखने के लिए तड़पता रहेगा। और जितना देखेगा उतना ही खोखला लगेगा, फिर तू perfect video की खोज में घंटों फूंक देगा। धीरे-धीरे तुम हर नई, shocking, या जज्बाती porn के पीछे भागने लगोगे।

कुछ लोग कहते हैं कि वो सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि उनके यार-दोस्त सब देखते हैं। अगर तेरे यार-दोस्त कुएं में कूदने लगे तो तू भी कूद जाएगा? ज्यादातर लोग सोच-विचार के बाद यही बोलते हैं कि बस आदत है यार। ये कोई reason नहीं हुआ, पर जब सारी समझदारी वाली वजहें खत्म हो जाती हैं तो यही बहाना बच जाता है। और ये बहाना भी एकदम बकवास है। हम रोज जिंदगी में कितनी आदतें बदलते हैं, जिनमें से कुछ तो मजेदार भी होती हैं। बस हमारे दिमाग में ये भर दिया गया है कि PMO एक आदत है और आदतें छोड़ना मुश्किल होता है।

क्या habits तोड़ना इतना मुश्किल है? अमेरिका में लोग right side से गाड़ी चलाने की habit में हैं, लेकिन विदेश जाते ही बिना किसी झंझट के दूसरी तरफ चलाने लगते हैं। और जब नई job मिलती है तो नया routine अपना लेते हैं, यानी habits बदल जाती हैं। इनमें थोड़ा टाइम लगता होगा, लेकिन ये porn की लत से लड़ने जैसा नहीं है। हम रोज़ नई habits बनाते और तोड़ते हैं, फिर एक ऐसी habit को तोड़ने में इतनी दिक्कत क्यों होती है जो न करो तो तड़पाती है, करो तो guilty feel कराती है, जिसे हम खुद तोड़ना चाहते हैं, जब सिर्फ इतना करना है कि इसे बंद कर दो?

असल में porn कोई मामूली आदत नहीं है, ये नशे जैसी चीज़ है! इसीलिए इसे ‘छोड़ना’ इतना पहाड़ जैसा लगता है। ज्यादातर लोग नशे की असलियत नहीं समझते और सोचते हैं कि porn से उनकी लाइफ में कुछ स्पेशल मिलता है, कोई सहारा मिलता है। उनको लगता है कि छोड़ेंगे तो जैसे जिंदगी से कुछ छीन जाएगा।

एक मस्त बात बता रहा हूं: porn addiction की असलियत और इसे use करने की वजहें समझ जाओगे, तो बस, एक झटके में छोड़ दोगे। । तीन हफ्ते बाद तू खुद सोचेगा कि इतने दिन ये सब करता क्यों रहा, और तू पागल होगा अपने दोस्तों को ये बताने के लिए कि यार, इस चक्कर से बाहर निकल के जो आजादी मिलती है न, वो किसी जन्नत से कम नहीं!

3.1 खतरनाक जाल

Internet porn एक खतरनाक जाल है जो इंसान और कुदरत ने मिलकर बिछाया है। कुछ लोगों को तो इसके खतरों के बारे में बताया भी जाता है, पर हमारी नादान अक्ल को लगता है कि अरे हमें तो मजा आ रहा है। लेकिन पहली बार हम इसमें फंसते कैसे हैं? आमतौर पर amateur और professional लोगों के free के सैंपल से। बस ऐसे ही जाल में फंस जाते हैं। अगर पहली बार देखने से पहले ही पता चल जाता कि आगे क्या तबाही है, तो खतरे की घंटी बज जाती।

लेकिन ये घंटियां बजती नहीं हैं। शायद बहुत सारी clips की shocking नेचर ही हमारे young दिमाग को यकीन दिला देती है कि हम कभी addict नहीं होंगे, ये सोचकर कि जब हमें इनसे मजा ही नहीं आ रहा तो जब चाहें छोड़ सकते हैं। या फिर soft content की मासूमियत कोई घंटियां नहीं बजाती, बिल्कुल वैसे ही जैसे Charles Sobhraj चालाकी से सबके दिमाग को घुमा देता था। अगर हम थोड़े भी समझदार होते, तो पता चल जाता कि आधी दुनिया क्यों ऐसी चीज़ की लत में डूबी है जो हमारी वही ताकत छीन रही है जो हम देख रहे हैं। curiosity हमें addiction के दरवाजे तक ले आती है, लेकिन हम उन thumbnails पर क्लिक करने की हिम्मत नहीं करते जिन्हें हम देख रहे होते हैं, डर के मारे कि कहीं हम बीमार न पड़ जाएं या कोई गलत रास्ते पर न चल पड़ें। और गलती से अगर कभी क्लिक हो जाए, तो एक तरफ जल्दी से भागना चाहते हैं, लेकिन साथ ही और ज्यादा जानने की खुजली होती है।

एक बार इस रास्ते पे चले कि बस फंस गए भाई। फिर पूरी लाइफ इसी सोच में निकल जाती है कि ये कर क्यों रहे हैं, अपने बच्चों को समझाते हैं कि कभी इस चक्कर में मत पड़ना, और खुद भी कभी-कभी इस जाल से निकलने की कोशिश करते हैं। ये ट्रैप ऐसा है कि जब तक कोई बड़ी ‘आफत’ न आ जाए - चाहे वो sex performance की problem हो, नौकरी या relationship टूटने का डर हो, या जिंदगी में कुछ करने का जोश ही खत्म हो जाए, या फिर बस खुद को गंदा महसूस करें। जैसे ही छोड़ते हैं, withdrawal के कारण और stress हो जाता है, और जिस चीज़ से stress दूर करते थे वो अब available नहीं रहती।

छोड़ने का प्लान धीरे-धीरे ढीला पड़ जाता है। कुछ दिन की मुसीबत झेलने के बाद खुद को समझा लेते हैं कि यार, अभी सही time नहीं है, चलो कोई ऐसा time आने दो जब जिंदगी में शांति हो। और जब वो time आता है तो वो कारण ही भूल जाते हैं जिसके लिए छोड़ना था। वो perfect time तो कभी आने वाला नहीं, और हमें लगता रहता है कि यार, लाइफ में टेंशन बढ़ती ही जा रही है। Mommy-Papa का साया हटा नहीं कि job की stress, घर की जिम्मेदारी, loan की EMI, मकान का जुगाड़, और बच्चों की फिक्र - सब एक साथ सिर पे आ जाता है। पर ये सब मन का वहम है। किसी की भी life में सबसे ज्यादा stress वाला टाइम बचपन और जवानी का होता है।

हम जिम्मेदारी और stress को एक ही समझ बैठते हैं। नशे की तरह ही, porn देखने वाले की life अपने आप stress से भर जाती है क्योंकि porn कोई शांति देने वाली चीज नहीं है या stress कम नहीं करती। उल्टा होता है - जितना देखो उतनी stress बढ़ती जाती है, हर रात के बाद की शर्मिंदगी और बोझ बढ़ा देती है। भले ही कुछ लोग छोड़ देते हैं - ज्यादातर लोग जिंदगी में कई बार करते हैं - और खुशी से जीते हैं लेकिन एक झटके में फिर लत लग जाती है। porn के इस चक्करदार रास्ते में घुसे कि दिमाग धुंधला हो जाता है और बाकी की जिंदगी निकलने में गुजर जाती है। कई लोग निकल भी जाते हैं, पर फिर इस जाल में फंस जाते हैं।

porn की लत से छुटकारा पाना एक अजीब पहेली। उलझी हुई और मुश्किल भी बहुत। पर एक बार जवाब पल्ले पड़ जाए, तो इतनी आसान और मजेदार लगती है कि हंसी आती है - अरे, ये तो एकदम सीधी बात थी! EasyPeasy में इस पहेली की चाबी है, जो तुम्हें इस चक्कर से बाहर निकाल देगी, और तुम दोबारा कभी इसमें नहीं फंसोगे। बस एक काम करना है - हर instruction को शब्द-शब्द follow करना है। लेकिन अगर तुमने chapters skip करके shortcut मारा, या पहली बार पढ़ते वक्त बिजली की speed से book के पन्ने पलटते जाओ बिना ठीक से समझने की कोशिश किए, तो बाकी सारी instructions बेकार हो जाएंगी।

कोई भी इसे आराम से छोड़ सकता है यार, बस पहले कुछ बातें समझ लो। नहीं, ऐसी बातें नहीं जो तुम्हें डरा दें, ऐसी जानकारी तो पहले से ही बहुत है बाहर। अगर डर से छूटना होता, तो तुम कब के छोड़ चुके होते। पर सवाल ये है कि छोड़ना इतना मुश्किल क्यों लगता है? इसका जवाब पाने के लिए हमें समझना होगा कि हम अभी तक इस चक्कर में क्यों फंसे हैं, और ये दो factors है:

  • प्रकृति और internet porn का रिश्ता

  • Society की brainwashing.

Porn देखने वाले समझदार लोग होते हैं। वो जानते हैं कि future में बड़े risks ले रहे हैं इसलिए अपनी ‘आदत’ को जायज ठहराने में बहुत वक्त लगाते हैं। लेकिन दिल से हर user जानता है कि वो बेवकूफी कर रहा है, ये भी जानता है कि लत लगने से पहले उसे porn की जरूरत नहीं थी। ज्यादातर को याद है कि पहली ‘झलक’ में घिन भी आई थी और नई चीज की curiosity भी थी। फिर वो sites ढूंढने, filter करने और bookmark करने में expert बन जाते हैं, मतलब अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मारते हैं।

अनौखी बात ये है कि जो addict नहीं हैं - ज्यादातर लड़कियां, बूड़े लोग, और वो लोग जिनके देश में high-speed internet porn नहीं है - उन्हें लगता ही नहीं है कि वो कुछ miss कर रहे और उन्हें ये सब हंसी-मजाक लगता है। अगले chapters में इन factors को समझने के बाद तुम भी इस खतरनाक जाल को पहचान लोगे!