अध्याय 7 छोड़ने से मैं क्या खो रहा हूं?

कुछ भी नहीं! Porn छोड़ना मुश्किल इसलिए लगता है क्योंकि हमें डर लगता है कि हमारा pleasure या सहारा छिन जाएगा। डर लगता है कि life के मजेदार मौके अब उतने मजेदार नहीं रहेंगे। डर कि stressful situations को handle नहीं कर पाएंगे। यानी ये brainwashing का असर है जो हमें believe करा देता है कि sex - और खास तौर पर orgasm - के बिना जीना बेकार है। और सबसे बड़ी गलतफहमी ये है कि internet porn में कुछ ऐसा है जो हमारी जरूरत है, और अगर छोड़ेंगे तो life में खुद को कुछ deny कर रहेु हें, और एक खालीपन आ जाएगा।

कान खोल के सुन लो: Porn जिंदगी का खालीपन नहीं भरती, ये खालीपन पैदा करती है!

हमारा शरीर इस planet का सबसे advanced system है। चाहे तुम intelligent design में believe करो, natural selection में, या दोनों में - हमारा body machine से हजार गुना ज्यादा efficient है! हम एक छोटी सी living cell भी नहीं बना सकते, या vision, reproduction और हमारे body या brain के interlinked systems जैसे miracles नहीं बना सकते। अगर इस creator या nature ने चाहा होता कि हम supernormal stimulus को handle कर सकें, तो हमें अलग तरह का reward system दिया होता। हमारे body में warning system लगा हुआ है और इसे ignore करना खतरनाक है।

7.1 खोने को कुछ हे ही नहीं

एक बार जब तुम अपने body से छोटे शैतान को और दिमाग से brainwashing (महाशैतान) को निकाल दोगे, तो न तो बार-बार masturbate करने का मन करेगा, न ही इसके लिए internet porn की जरूरत पड़ेगी। Porn की लत के बारे में डॉक्टर भी confused हैं - कई तो ये भी नहीं जानते कि किसी को porn addict कैसे बोलें। बहुत सारे symptoms को गलत कारणों से जोड़ दिया जाता है। बात ये नहीं है कि porn देखने वाले लोग बेवकूफ हैं। असल में वो दो नावों में पैर रखे हुए हैं - एक तरफ पोर्न न देखकर तड़पते हैं, दूसरी तरफ देखकर guilt में डूबते हैं और खुद से नफरत करने लगते हैं। जब back pain या sexual dysfunction की problems जैसे लक्षण सामने आते हैं, तो दिमाग दो राह पर खड़ा होता है: - या तो मानो कि ये पोर्न की वजह से है, या फिर अपने आप को धोखा देते रहो

cigarettes पीने वालों को देखा है ना - कैसे चोर की तरह इधर-उधर देख के एक कश के लिए खिसक जाते हैं। बस यही है addiction की असलियत। कोई शौक से नहीं करता ये सब, मजबूरी है - क्योंकि cigarettes बिना उनकी हालत खराब हो जाती है।

बहुत लोगों को पहले sexual experience में orgasm होता ही है, तो उन्होंने मान लिया कि orgasm के बिना sex में मजा नहीं आ सकता। लड़कों को porn को इस तरह बेचा जाता है जैसे ये sex में help करेगी, कभी-कभी तो ये भी कहा जाता है कि ये act के दौरान confidence बढ़ाने की training है। ये सब बकवास है, ये supernormal stimulus तो उल्टा सब कुछ खराब कर देती है।

इसमें खोने को कुछ है ही नहीं, उल्टा फयदे बहुत हें। जब users छोड़ने की सोचते हैं, तो ज्यादातर health और sexual health के बारे में सोचते हैं। ये सब तो है, पर मैं कहता हूं सबसे बड़ा फायदा मानसिक होता है:

  • तुम्हारा confidence और हिम्मत वापस आ जाती है।

  • गुलामी से आजादी मिल जाती है।

  • दिमाग के पीछे वो काले साए नहीं रहते और खुद से नफरत नहीं करनी पड़ती।

7.2 खालीपन से मत डरो, यही तो आज़ादी है!

एक example समझो - जैसे तुम्हारे मुंह पर घाव हो गया। तुम medical store गए और दुकानदार ने एक free की ointment दे दी try करने को। तुमने लगाई और घाव फटाफट गायब। हफ्ते भर बाद वो फिर आ गया, तो तुम फिर दुकान पर गए और पूछा कि और ointment मिलेगी क्या? दुकानदार बोला “ले जाओ पूरी tube, आगे काम आएगी।”

तुम ointment लगाते हो और जादू! घाव गायब। पर हर बार जब ये वापस आता है, तो और बड़ा और ज्यादा दर्द देने वाला होता जाता है, और वापस आने का time भी कम होता जाता है। धीरे-धीरे ये पूरे चेहरे पर फैल जाता है और इतना दर्द होता है कि जान निकल जाए, और अब तो हर आधे घंटे में आ रहा है। तुम जानते हो ointment से temporary रिलीफ मिल जाएगी, पर डर लग रहा है। कहीं ये पूरे बदन पर तो नहीं फैल जाएगा? कहीं ये permanent तो नहीं हो जाएगा? Doctor के पास जाओ तो वो भी हाथ खड़े कर दे, कुछ और try करो तो कुछ काम नहीं करे - सिर्फ वो ointment ही थोड़ी राहत दे।

अब हालत ये है कि तुम उस ointment पर dependent हो गए हो, हर वक्त check करते हो कि tube जेब में है। विदेश जाना हो तो पूरा ointment का stock लेकर चलते हो। और अब तो सेहत की tension अलग, ये दुकानदार भी लूट मचा रहा है - एक tube के हजार रुपए! पर क्या करें, देने पड़ते हैं, कोई चारा नहीं।

फिर अचानक तुम्हें एक article मिलता है जिसमें इस बारे में लिखा है और पता चलता है कि ये सिर्फ तुम्हारे साथ नहीं हो रहा, बहुत लोग इसी problem से जूझ रहे हैं। असल में medical community को पता चला है कि वो ointment घाव को ठीक नहीं करती, बस skin के अंदर धकेल देती है। घाव को बढ़ाने वाली वो ointment ही है, तो इससे छुटकारा पाने के लिए बस ointment use बंद करो और थोड़े टाइम में problem खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगी।

क्या तुम अब भी वो ointment use करोगे? क्या ointment न लगाने के लिए willpower की जरूरत पड़ेगी? हो सकता है article पर यकीन न हो तो कुछ दिन डर लगे, पर जब देखोगे कि घाव धीरे-धीरे ठीक हो रहा है, तो ointment की जरूरत या चाहत खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगी। क्या तुम दुखी होगे? बिल्कुल नहीं! तुम्हें लगता था कि ये problem कभी ठीक नहीं होगी, पर अब solution मिल गया है। चाहे छाले को ठीक होने में एक साल भी लग जाए, पर रोज सुधार देख कर तुम सोचोगे कि कितना अच्छा लग रहा है। पोर्न छोड़ने का जादू भी कुछ ऐसा ही है।

वो घाव सिर्फ body pains नहीं है, normal sex drive की कमी नहीं है, arousal में दिक्कत या performance की problems नहीं है, flat screen पर बर्बाद किया गया time नहीं है, अपनी life पर से control खोने का एहसास नहीं है, और न ही वो शर्मिंदगी है जो तब होती है जब कोई पकड़ ले या इससे भी बुरा - खुद से ही नफरत करने लगो। ये सब तो उस घाव के अलावा की problems हैं।

घाव हमारे हमारी आंखों पर पट्टी बांध देता है - वही panic वाली feeling जब नशे की डोज चाहिए होती है। जो लोग users नहीं हैं, उन्हें ये feeling नहीं होती। असल में हम जो सबसे ज्यादा झेलते हैं वो है डर, और सबसे बड़ी जीत है इस डर से आजादी। ये डर पहले session से शुरू होता है, और हर अगले session के साथ और मजबूत होता जाता है।

कुछ users ‘खुश’ होते हैं, क्योंकि उनके दिमाग का छोटा शैतान उन्हें सच्चाई से अंधा कर देता है। वो ये बुरा सपना जीते हैं, बस फर्क इतना है कि अपनी बेवकूफी को justify करने के लिए झूठे-सच्चे बहाने बनाते रहते हैं।

वाह! क्या मजा है इस आज़ादी में!