अध्याय 14 Casual Users

Heavy users अक्सर casual users से जलन महसूस करते हैं। ऐसे लोग आपने भी देखे होंगे: “मैं क्या करता हूं? हफ्ते भर नहीं देखूं तो भी कोई tension नहीं। मुझे तो कोई फर्क ही नहीं पड़ता। हम सोचते हैं - काश हम भी ऐसे होते। मानना मुश्किल लगेगा, पर एक सच्चाई सुन लो - कोई भी user, चाहे कितना भी casual हो, अंदर से खुश नहीं है। याद रखो:

  कोई भी user, चाहे casual हो या heavy, कभी सोच-समझकर user नहीं बना, इसलिए,
      हर user खुद को बेवकूफ महसूस करता है, इसलिए,
        हर user को अपनी बेवकूफी justify करने के लिए खुद से और दूसरों से झूठ बोलता है।

Cricket के दीवाने फख्र से बताते हैं की वो कितना खेलते हैं, और कितना और खेलना चाहते हैं। लेकिन porn users उल्टा करते हैं - गर्व से कहते हैं की वो कितना कम देखते और masturbate करते हैं। अरे भाई, अगर कम देखना इतनी बड़ी बात है, तो बिल्कुल ना देखना तो सबसे बड़ी achievement हुई ना? खुद ही सोचो।

अगर कोई आपसे कहे, “मैं पूरे हफ्ते आम नहीं खाता, बिल्कुल मन भी नहीं करता।” आप क्या सोचेंगे? पागल है क्या? अगर पसंद है तो खाओ, नहीं पसंद तो ये बताने की क्या जरूरत? तो जब कोई user कहता है की वो एक हफ्ते बिना session के रह सकता है, तो वो असल में खुद को - और आपको - ये यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा है की उसे कोई problem नहीं है। लेकिन अगर सच में कोई problem नहीं होती, तो ये बात बताने की जरूरत ही क्या थी? इस statement का असली मतलब है - “वाह भाई वाह, सात दिन survive कर लिया मैंने, बिना porn के” और हर user की तरह, उम्मीद लगाए बैठा है की ऐसे ही पूरी जिंदगी survive कर पाएगा। अगर एक हफ्ता रह पाना इतनी बड़ी बात है, तो उसके बाद का session कितना special रहा होगा? सात दिन की ‘तड़प’ के बाद का ‘इनाम’?

इसलिए casual users असल में heavy users से ज्यादा बुरी तरह फंसे होते हैं। उन्हें pleasure का भ्रम तो ज्यादा होता ही है, छोड़ने का motivation भी कम होता है क्योंकि कम time लगाते हैं और इसलिए health risks भी कम लगते हैं। कभी-कभी उन्हें sexual dysfunction का problem होता है, पर उन्हें पक्का पता नहीं होता की वजह क्या है, तो वो दूसरी चीज़ों पर blame कर देते हैं। users को जो pleasure मिलता है वो सिर्फ search-and-seek का dopamine cycle और withdrawal की बेचैनी से राहत है। ये pleasure एक भ्रम है।

जब शरीर में कहीं लगातार खुजली हो, तो आप उसे खुजाते हैं। जैसे-जैसे reward circuits dopamine और opioids के लीये immune होता जाता है, वैसे-वैसे natural tendency होती है लंबे time तक edge करने की, escalate करने की, binge करने की, नई-नई categories खोजने की, shocking content ढूंढने की। लेकिन चार main factors हैं जो users को लगातार देखने से रोकते हैं। Time. ज्यादातर लोगों के पास इतना वक्त ही नहीं होता।

सेहत। उस खुजली को मिटाने के लिए जितना मिले उतना कम पड़ता है। हर व्यक्ति की इस तरह के binging को handle करने की capacity अलग-अलग होती है, और ये उनकी life के अलग-अलग time और situations में भी बदलती रहती है। ये एक automatic brake की तरह काम करता है।

Discipline. समाज से, काम से, दोस्तों और रिश्तेदारों से discipline आता है, या फिर कभी-कभी user खुद भी अपने ऊपर ये discipline लगा लेता है - ये सब उसके दिमाग में चल रही natural कशमकश का नतीजा है।

Imagination. Imagination की कमी हर clip के shock value, novelty और दूसरी qualities को subjective तरीके से कम कर देती है।

लोग सोचते हैं की heavy users कमज़ोर हैं - control नहीं कर पाते। लेकिन heavy users को ये समझना चाहिए की ज्यादातर casual users लगातार देख ही नहीं सकते - उसके लिए बहुत strong imagination और stamina चाहिए होता है। जिन week-में-एक-बार वाले users से heavy users जलते हैं, उनमें से कई या तो physically ज्यादा कर ही नहीं सकते, या फिर उनका काम, समाज, या खुद का डर - की कहीं addict ना हो जाएं - उन्हें रोक देता है।

कुछ basic definitions समझ लेते हैं।

Non-user

वो जो अभी तक इस trap में नहीं फंसा है। लेकिन इन्हें भी सावधान रहना चाहिए। वो सिर्फ किस्मत या अच्छी परवरिश की वजह से बचा है। याद रखो - हर user ने कभी सोचा था की वो कभी addict नहीं होगा, और कुछ non-users कभी-कभार try करते रहते हैं।

Casual User

इसके दो basic types हैं:

  1. वो user जो trap में फंस चुका है पर उसे पता ही नहीं है। ऐसे users से जलन मत रखो। ये अभी चट्टान के किनारे खड़े हैं, नीचे गिरने ही वाले हैं। याद रखो, जैसे हर शराबी पहले social drinker था, वैसे ही हर heavy user की शुरुआत casual से होती है।

  2. वो user जो पहले heavy user थे, और अब सोचते है की वो छोड़ नहीं सकते। ये sad case हैं और इनके कई types हैं, जिन पर अलग से बात करेंगे।

रोज़ना-एक-बार वाले User

अगर उन्हें orgasm से इतना मज़ा आता है, तो सिर्फ एक बार क्यों? और अगर take it or leave it वाली बात है, तो करते ही क्यों हैं? ये ‘habit’ असल में अपना सिर दीवार पर मारना है ताकि बाद में मरहम लगाने में आराम मिले। रोज़-एक-बार वाला user दिन में एक घंटे से भी कम समय के लिए अपनी withdrawal की बेचैनी को शांत करता है। उसे पता नहीं चलता, पर बाकी का पूरा दिन वो इसी दीवार से सिर टकरा रहा होता है - और ये सिलसिला जिंदगी भर चलता है। वो रोज़ एक बार ही क्यों करता है? क्योंकि या तो पकड़े जाने का डर है, या फिर दिमाग की सेहत खराब करने का। Heavy user को समझाना आसान है की उसे मज़ा नहीं आ रहा, लेकिन casual user को ये समझाना बहुत मुश्किल है। जिसने भी कभी cutting down की कोशिश की है, वो जानता है - ये सबसे बड़ी यातना है, और लगभग guaranteed है की आप जिंदगी भर addict रहोगे।

Rejected User (जिसे Partner से No मिला हो)

इन्हें हर दिन orgasm चाहिए होता है, पर उनका partner हमेशा ready नहीं होता। शुरू में ये इस कमी को पूरा करने के लिए internet porn का सहारा लेते हैं, पर एक बार इस ‘exciting water slide’ पर जाने के बाद नई-नई categories, shock clips, असल से परे की fantasies के चक्कर में फंस जाते हैं। असल में जब partner मना करता है, तो इन्हें बहाना मिल जाता है। अगर porn से इतनी संतुष्टि मिल रही है, तो real partner की ज़रूरत क्या है? उन्हें आज़ाद कर दो। उन्हें तब भी मज़ा नहीं आता जब वो अपने partner को fantasize करके देखते हैं। वो चाहने लगते हैं की real-life partner उन्हें कोई बहाना दे ताकि वो internet की अंधेरी वादियों में जा सकें।

Porn-Diet वाले User

जिसका famous dialogue होता है: “मैं जब चाहूं छोड़ सकता हूं। हज़ारों बार छोड़ चुका हूं!”

अगर सोचते हो की porn-dieting से partners ढूंढने का mood बनता है, तो फिर चार दिन में एक बार की diet क्यों? कोई future नहीं जानता, और क्या होगा अगर किसी से मिलने का मौका आपके scheduled session के एक घंटे बाद आ जाए? और अगर occasional ‘pipe-साफ-करना’ tension दूर करने के लिए अच्छा है, तो फिर रोज़ क्यों नहीं करते? ये proven है की masturbation genitals को healthy रखने के लिए ज़रूरी नहीं है, और internet porn तो बिल्कुल भी नहीं। यहां तक की अगर ऐसा भी हो, तो कोई भी pick-up-artist ‘guru’ जो neurological damage के बारे में पढ़ चुका है, कभी भी super-stimulus porn recommend नहीं करेगा। सच्चाई ये है की porn-diet वाले अभी भी hooked है। भले ही physical addiction से छुटकारा पा लिया हो, पर primary problem - brainwashing - अभी भी बाकी है। हर बार उम्मीद करता है की इस बार हमेशा के लिए छोड़ देगा, पर जल्द ही वही पुराना trap फस जाते है।

ज्यादातर users इन रुक-रुक कर देखने वालों को जलते हैं, सोचते हैं कि dieters कितने ‘lucky’ हैं, जो अपने usage को control कर लेते हैं। लेकिन वो एक बात नहीं जानते - dieter usage control नहीं कर रहा है। जब use कर रहा होता है, तब चाहता है ना करे। रुकने की मुसीबत झेलते है, फिर deprived feel करता है और दोबारा trap में फंस जाता है, फिर पछताता है की काश फंसा ना होता। दोनों तरफ से नुकसान ही नुकसान। अगर सोचें तो यही सच्चाई हर user की life में है जब उन्हें session की permission होती है - या तो इसे अपना हक़ समझते हैं, या फिर चाहते हैं की ना करें। Porn कीमती तभी लगता है जब इससे दूर रहना पड़े। ये ‘मना किए हुए फल’ वाला syndrome users के लिए सबसे बड़ी दुविधा है। वो जीत ही नहीं सकते क्योंकि वो एक भ्रम के लिए दुखी हो रहे हैं। जीतने का सिर्फ एक ही रास्ता है - porn छोड़ो और दुखी होना बंद करो!

“मैं सिर्फ Soft/Normal/Home-Made Porn देखता हूं’ वाले User

हां, शुरुआत में सब ऐसा ही करते हैं, लेकिन अजीब बात है, कि clips का shock-value बढ़ता जाता है, और हमें कम ही लगता है? Static porn में novelty नहीं होती, इसलिए हम थोड़ी सी excitement के लिए बड़ी कीमत चुकाते हैं और guilt की water slide पर फिसलते चले जाते हैं। सबसे बेकार चीज़ जो लोग करते हैं वो है अपने partner की pictures देखकर (भले ही permission हो) masturbate करना। क्योंकि इस process में तुम अपने दिमाग की programming बदल रहे हैं - खोजने, ढूंढने और नई-नई categories/clips से मिलने वाले dopamine rush के लिए। Chemistry की भाषा में, दिमाग की porn water-slides DeltaFosB को बढ़ा रही हैं, इसलिए जब आप real में partner के साथ होंगे तो आपको difficulties होंगी।

इस category में एक और trap है ‘amateur’ और ‘home-made’ porn। ज्यादातर fake होते हैं और तुम भी जानते हैं, और साथ ही तुम पहली clip देखकर रुकने वाले भी नहीं हैं, बल्कि खोजते और ढूंढते रहोगे। दिमाग सिर्फ orgasm नहीं चाहता, बल्कि नई categories/clips की खोज का जो नशा है, वही water-slide को exciting बनाता है। Porn content असली मुद्दा नहीं है - चाहे amateur हो या professional - असली मुद्दा है दिमाग में dopamine का बार-बार आना जो tolerance और satiation बढ़ाता है। Porn normal brain function को खराब करता है, masturbation muscle-mind connection को गड़बड़ा देता हैै; orgasm दिमाग को opioids से भर देता है और अगली बार दिमाग में ये neural pathway और भी मज़बूत हो जाती है।।

“मैंने छोड़ दिया है, बस कभी-कभार देख लेता हूं” वाले User

ये peek करने वाले users सबसे sad case होते हैं। या तो वो life भर यही सोचते रहते हैं कि उनसे कुछ miss हो रहा है, या फिर mostly, एक peek दो peek में convert हो जाता है, slippery slope पे slide करते हुए नीचे जाते हैं, और कभी न कभी वो heavy users बन ही जाते हैं। वो फिर से उसी trap में गिर जाते हैं जिसमें पहली बार गिरे थे।

Casual users के दो और types हैं। पहला वो है जो नई celebrity scandals या leaked videos पर masturbate करते हैं, या फिर school/office में ‘गलती से’ देखी चीज़ों को याद करते हैं। ये लोग actually non-users ही हैं, पर उन्हें feeling आती है कि कुछ miss हो रहा है। वो भी action का part बनना चाहते हैं, और हम में से ज्यादातर ने ऐसे ही start किया था। अगली बार notice करना, कुछ time के बाद आपकी fantasy का celebrity भी वो effect नहीं देता। और जितना ज्यादा impossible target आप choose करते हैं fantasy में, उतनी ही ज्यादा frustrating होती है orgasm के बाद की feeling।

Second category आजकल काफी popular हो रही है। एक real case से समझते हैं जो online share की गई थी।

एक professional महिला की कहानी है। वो सालों से internet पर erotic stories पढ़ती थी, रोज़ रात को एक बार। मज़े की बात ये थी की वो बहुत strong-minded थी। अब ज्यादातर लोग सोचेंगे - उसे छोड़ने की problem ही क्या थी? वो फख्र से कहेंगे की ladies में तो न ED का risk होता है, न premature-ejaculation का (ये एक myth है)। वो तो pictures भी नहीं देखती थी, बस stories पढ़ती थी - जो daily porn use से light/soft है।

लोग समझते हैं की casual users ज्यादा खुश और control में होते हैं। Control में हो सकते हैं, पर खुश? No way. इस महिला का ही देखो - न partner से satisfaction था, न real sex से। और normal life की stress में इतनी चिड़चिड़ी हो जाती थी की घर वाले भी परेशान थे की इसे हो क्या गया है। खुद को कितना भी समझाए की उसका usage normal है, real relationships में मज़ा नहीं आ रहा था। और relationships में तो ups downs आते ही हैं। रोज़ का dopamine hit इतना strong था की normal खुशियां feel ही नहीं होती थीं। Brain के receptors इतने down हो गए थे की हर वक्त sad ही रहती थी। बाकी सबकी तरह, शुरू में उसे भी porn के dark side और ये डर था की porn में महिलाओं के साथ क्या-क्या होता है। फिर society के brainwashing में आ गई और पहली site try की। पर ज्यादातर लोगों की तरह addict नहीं हुई, violent clips देखकर रुक गई।

Porn में जो enjoyment है वो craving खत्म करने का होता है, चाहे वो physical craving हो, या फिर खुजली को न खुजा पाने का mental torture हो। Internet porn खुद में एक poison है, इसीलिए तो जब कुछ दिनों रुकने के बाद enjoyment का भ्रम होता है। भूख-प्यास की तरह, जितना ज्यादा time भूखे रहो, खाना खाने पर उतना ही ज्यादा relief मिलता है। गलती ये है की लोग इसे habit समझते हैं और सोचते हैं: “अगर मैं इसे control में रखूं, या sirf special occasions पे ही देखूं, तो मेरा दिमाग और body adjust कर लेगा। फिर मैं या तो इतना ही continue कर सकता हूं या फिर जब चाहूं कम कर सकता हूं।”

एक बात समझ लो - porn कोई ‘habit’ नहीं है। ये एक drug addiction की तरह है, और जब withdrawal से बेचैनी होगी तो आप porn देखकर उससे छुटकारा पाना चाहोगे। जिस usage level पे हो, वहां रोके रखने के लिए आपको life भर बहुत ज्यादा discipline और willpower लगेगी। जैसे-जैसे आपके brain का reward system dopamine और opioids का आदी होता जाता है, वो और ज्यादा porn चाहता है।

जैसे-जैसे porn आपके nervous system, courage, confidence, और self-control कोे destroy करता है, sessions के बीच का gap कम होता जाता है। इसीलिए शुरुआत में control करना आसान है। अगर mentally या physically कुछ गड़बड़ लगे, तो भी रोक सकते हैं। इस महिला से jealous मत हो - जब कोई बस 24 घंटे में एक बार देखते हो तो लगता है कितना luckey है। पर इस महिला के मन में कई सालों से एक खींचतान चल रही है, जो तुम नहीं देख सकते।”

वो चाह के भी erotic stories quit नहीं कर पा रही थी, पर videos तक जाने से भी डरती थी। हर दिन के 23 घंटे 10 मिनट वो temptation से और अपने boyfriend के लिए feelings की कमी से लड़ती रहती थी। उसने पूरी willpower से कोशिश की, और आखिर में वो रो ही पड़ी। ऐसे cases rare होते हैं, पर logically सोचो: या तो porn में कोई real support या pleasure है, या नहीं है। अगर है, तो कौन एक घंटा, एक दिन, या एक हफ्ता wait करना चाहेगा? बीच के time में इस support या pleasure से खुद को क्यों दूर रखना? और अगर कोई real support या pleasure नहीं है, तो online कोथे में जाने का point ही क्या है?

यहाँ एक और case है, एक चार-दिन-में-एक-बार वाले आदमी का, जो अपनी life के बारे में ऐसा बताता है:

“मैं 40 साल का हूं, मुझे PIED (porn की वजह से erectile dysfunction) की problem है - real women के साथ भी और porn देखते वक्त भी, जो कि मैं ज्यादातर करता हूं। इस चार दिन वाली porn diet पे जाने से पहले, session के बाद रात भर अच्छी नींद आती थी। अब हर घंटे नींद खुल जाती है और बस यही सोचता रहता हूं। सोते वक्त भी favorite clips के सपने आते हैं। Session के बाद वाले दिन मैं काफी down feel करता हूं, ये diet मेरी सारी energy ले लेती है। मेरी partner मेरे साथ time spend नहीं करती क्योंकि मैं चिड़चिड़ा हो जाता हूं, और कहीं जा नहीं सकती तो मुझे घर में नहीं आने देती। मैं jogging के लिए जाता हूं पर दिमाग में बस यही चलता रहता है।

“Schedule वाले दिन मैं शाम से ही planning करता हूँ, और कोई plan disturb करे तो एकदम irritate हो जाता हूं। किसी से बात करने का मन नहीं करता और हर चीज़ में हां में हां मिला देता हूं (बाद में पछताता हूं)। वैसे तो मैं झगड़ालू नहीं हूं, बस नहीं चाहता कोई मुझे रोके। कई बार तो wife से फालतू की बहस कर लेता था। रात के दस बजे का इंतज़ार करता हूं और जब time आता है तो मेरे हाथ कांपने लगते हैं। सीधा start नहीं करता - नई videos search करता हूं। सोचता हूं कि चार दिन रुका हूं तो कुछ ‘खास’ देखने का हक़ बनता है, जो इतनी searching के लायक हो। फिर एक-दो videos final करता हूं, कोशिश करता हूं की लंबा चले ताकि अगले चार दिन निकल जाएं, इसलिए जल्दी finish नहीं करता।”

अपनी बाकी problems के अलावा, इस बेचारे को ये भी नहीं पता कि वो खुद को porn का जहर दे रहा है। पहले तो वो ‘forbidden fruit syndrome’ से suffer कर रहा है और फिर अपने दिमाग को dopamine flush करने पर force कर रहा है। उसके dopamine receptors इतने damaged नहीं हुए हैं, लेकिन वो porn की water slides को और slippery बना रहा है - अगले चार दिन survive करने के लिए edging, नई categories/clips, variety, shock और anxiety ढूंढ रहा है। तुम को लग रहा होगा कि ये आदमी loser है, लेकिन ऐसा नहीं है। एक former athlete और marine sergeant होने के नाते, वो किसी भी चीज़ का addicted नहीं होना चाहता था। लेकिन war से वापस आने के बाद उसने rehab program में IT technician की training भी ली।

Civil life में आया तो bank में अच्छी position पे IT professional था, laptop भी मिला घर ले जाने को। उस साल कुछ famous celebrities के porn videos ‘leak’ हुए थे और हर जगह यही topic था। बस फिर क्या था, फंस गया इसमें और बाकी की life अपने आप को mentally और physically destroy करने में निकाल दी। अगर वो एक जानवर होता तो society ने उसे इस दर्द से मुक्ति दे दी होती, लेकिन हम अभी भी mentally और physically healthy teenagers को इस trap में फंसने देते हैं। आपको लग रहा होगा ये सब exaggerate किया गया है, लेकिन ये case अकेला नहीं है - हज़ारों ऐसी stories हैं। सोचिए, क्या उसके आस-पास के लोग उससे जलते नहीं होंगे कि वो चार दिन तक control कर लेता है? अगर तुम्हें लग रहा है कि तुम कभी ऐसे नहीं फंसोगे, तो खुद को धोखा देना बंद करो।

ये ALREADT हो रहा है

बाकी addicts की तरह, porn users भी champion होते हैं झूठ बोलने में, खुद से भी। मजबूरी है उनकी। जो casual users कहते हैं कभी-कभार देखते हैं, वो भी बहुत ज्यादा देखते हैं, बस बताते नहीं। ‘हफ्ते में दो बार’ वाले से थोड़ी देर बात करो तो पता चलता है की हफ्ते में तीन-चार बार तो हो ही गया। Reddit, NoFap और rebooting forums की stories पढ़ लो - या तो दिन गिन रहे हैं या फिर हार मानने का इंतज़ार कर रहे हैं। न casual users से जलो, न ही खुद use करो - life इसके बिना बहुत खूबसूरत है। ये log देखो:

“सब शुरू हुआ एक छोटे से challenge से - बस एक दिन रुक जाना, पर रुक नहीं पाया। और आज? अब तो सोचता भी नहीं हूं इस बारे में, mind में आता ही नहीं। विश्वास करो, ये हो सकता है। और life एकदम बदल जाती है - मज़ा आ जाता है।”

teenagers को cure करना मुश्किल होता है, इसलिए नहीं की उन्हें छोड़ना मुश्किल लगता है, बल्कि क्योंकि उन्हें यकीन ही नहीं होता की वो hooked हैं या फिर trap के शुरुआती stage में हैं। उन्हें ये भ्रम होता है की दूसरे stage से पहले वो automatically छोड़ देंगे।

जिन parents को लगता है की उनके बच्चे porn से दूर रहेंगे क्योंकि उन्हें इससे घिन आती है, उन्हें सावधान रहना चाहिए। Addiction से पहले हर कोई porn के dark side से डरता है। आप भी डरते थे। ये मत सोचिए की आजकल के awareness campaigns बच्चों को बचा लेंगे - जाल तो वही पुराना है। बच्चे समझते हैं की porn एक dangerous चीज़ है, पर साथ ही ये भी सोचते हैं की ‘एक बार’ या ‘थोड़ा सा’ देखने से कुछ नहीं बिगड़ेगा। फिर कभी girlfriend/boyfriend का pressure हो, कभी दोस्तों का, या फिर office में किसी का - बस एक trigger की देर है।

इस मामले में ढीली-ढाली approach मत रखो। सबसे डरावनी बात है की हमारा समाज अपने teenagers को internet porn और drugs से बचा नहीं पा रहा है। teenage में दिमाग बहुत जल्दी सीखता है और बदलता है, इसलिए इस age में समझाना और बचाना सबसे important है। शुरुआत कहां से करें, ये समझ नहीं आ रहा? YourBrainOnPorn.com की book पढ़िए - इससे तुम समझेगे की दिमाग पर क्या असर होता है। अगर तुमको लगता है की बच्चा पहले से ही इसमें फंस चुका है, तो भी ये book help करेगी - इससे आप उसे बाहर निकालने में मदद कर पाएंगे। या फिर सीधा उसे Easy-Peasy पढ़ने को दे दो!