अध्याय 22 Withdrawal के दोरान
आखरी session के बाद तीन हफ्तों तक withdrawal की बेचैनी का सामना करना पड़ सकता है। इसमें दो अलग-अलग चीज़ें होती हैं:
Dopamine withdrawal की बेचैनी - एक खालीपन, असुरक्षा की feeling, बिल्कुल भूख जैसी। इसे craving या ‘कुछ-तो-करना-है’ वाली feeling के रूप में पहचान सकते हो।
Psychological triggers - बाहरी चीज़ों से trigger होना, जैसे ads, online browsing, फोन पर बातें वगैरा।
इन दोनों को समझना और इनमें फर्क करना बहुत जरूरी है। Willpower वाले तरीके में अक्सर लोग इसी वजह से fail हो जाते हैं और फिर से जाल में फंस जाते हैं। Dopamine withdrawal में physical pain तो नहीं होता, लेकिन इसकी ताक़त काफी होती है। जैसे हम एक दिन भूखे रहने पर ‘भूख की मार’ की बात करते हैं - पेट में गड़गड़ाहट होती है, पर कोई असली pain नहीं होता। फिर भी भूख एक ताकतवर force है और खाना न मिलने पर हम चिड़चिड़े हो जाते हैं। Dopamine की भूख भी ऐसी ही होती है, बस फर्क ये है कि शरीर को खाने चाहिये, जहर नहीं। अगर mindset सही हो तो withdrawal की बेचैनी को आसानी से जीता जा सकता है और ये जल्दी ही गायब हो जाती है।
Willpower method में कुछ दिन रुकने के बाद dopamine की भूख तो कम हो जाती है। असली दिक्कत दूसरे factor - brainwashing - से आती है। User की आदत बन जाती है कुछ खास मौकों और वक्त पर withdrawal की बेचेनी को दूर करने की, जिससे एक समा बन जाता है (“मूड बन रहा है तो porn देखना ही होगा” या “लैपटॉप के साथ बेड पर हूं तो एक session तो बनता है”)। इसे एक example से समझो: मान लो तुम्हारी पुरानी कार में indicator बायीं तरफ था और नई में दायीं तरफ है। तुम जानते हो कि अब दायीं तरफ है, फिर भी एक-दो हफ्तों तक indicator की जगह wipers चला देते हो।
Porn छोड़ना भी ऐसा ही है: शुरुआती दिनों में triggers कुछ खास वक्त पर activate होगा। तुम्हारा दिमाग session की मांग करेगा, इसलिए पहले दिन से ही brainwashing को control करना जरूरी है, तभी ये triggers जल्दी गायब होंगे। Willpower के तरीके में user सोचता है कि वो कुछ sacrifice कर रहा है, इसलिए रोता-धोता रहता है और urges जाने का इंतज़ार करता है। इससे triggers कम होने की बजाय बढ़ जाते हैं। इसी तरह, guru thinking में user सोचने लगता है कि वो कब भगवान जेसा बनेगा और ये भी demand करता है कि उसे ये विचार नहीं आने चाहिए, जो खुद से नफरत और असफलता की तरफ ले जाता है।
एक common trigger है अकेला time, खासकर दोस्तों के साथ social events में। दूसरे methods से quit करने वाला ex-user पहले से ही दुखी होता है क्योंकि उसे लगता है उसका सहारा या सुख छिन गया है। उसके दोस्त अपने partners के साथ intimate हो रहे होते हैं। User या तो single होता है या फिर partner से वो ‘satisfaction’ नहीं मिल रही होती। जो social अवसर enjoyable होना चाहिए था, वो अब boring लगता है। उसके दिमाग में बने porn के water slides उसे porn की तरफ ले जाते हैं, क्योंकि ये partner को impress करने से ज्यादा आसान लगता है।
Sex को अपनी well-being से जोड़ने की वजह से, वो तीन गुना नुकसान झेल रहा होता है और brainwashing और बढ़ जाती है। अगर वो मज़बूत रहे और काफी time तक टिका रहे, तो वो इसे accept कर लेता है और life आगे बढ़ती है। लेकिन brainwashing का एक हिस्सा फिर भी रह जाता है। सबसे दुखद बात ये है कि quit करने के सालों बाद भी कुछ खास मौकों पर ‘बस एक आखिरी बार’ की इच्छा आती है। वो एक ऐसे भ्रम के पीछे भाग रहा होता है जो सिर्फ उसके दिमाग में है, और बेकार में खुद को torture करता है।
EasyPeasy method में भी, triggers को सँभालना सबसे आम problem है। Ex-user internet porn को एक placebo या toffee की तरह देखने लगता है। सोचता है, “मैं जानता हूं porn मेरे लिए कुछ नहीं करता, लेकिन अगर मैं सोचूं कि करता है तो कुछ खास मौकों पर मददगार होगा।” toffee, हालांकि physically कोई मदद नहीं करती, लेकिन psychologically genuine symptoms को दूर करने में दमदार हो सकती है और इसलिए फायदेमंद होती है। लेकिन internet porn और habitual masturbation toffee नहीं हैं। क्यों? क्योंकि porn उन symptoms को खुद बनाता है जिन्हें ये दूर करता है, और धीरे-धीरे उन्हें दूर करना भी बंद कर देता है।
एक non-user या ex-user का उदाहरण लो जिसने कई साल पहले porn छोड़ दिया। मान लो उसका break-up हो जाता है। ऐसे वक्त में अक्सर लोग अच्छी नीयत से कहते हैं, “एक बार porn देख लो, थोड़ी शांति मिलेगी।” अगर वो मान भी ले, तो भी कोई शांति नहीं मिलेगी क्योंकि अब न तो dopamine addiction है और न ही withdrawal की बेचेनी। ज्यादा से ज्यादा एक छोटा सा psychological boost मिलेगी।
Session खत्म होने के बाद भी दुख तो रहेगा ही। उल्टा, अब situation और खराब हो जाएगी क्योंकि अब withdrawal से बेचेनी भी शुरू हो जाएंगी। फिर दो options हैं: या तो बेचेनी झेलो, या फिर राहत के लिए दोबारा porn के water slide पर जाओ और दुख का cycle फिर से शुरू करो। Porn ने सिर्फ एक temporary psychological boost दी, जो एक book या feel-good movie से भी मिल सकती थी। बहुत से non-users और ex-users ऐसे में पर फिर से addict बन जाते हैं। एक बात दिमाग में clear कर लो: तुम्हें dopamine rush की जरूरत नहीं है और इसे किसी सहारे या boost की तरह देखकर तुम खुद को और torture कर रहे हो। दुखी होने की कोई जरूरत नहीं है।
orgasms से relationships अच्छे नहीं बनते, उल्टा ज्यादातर बार खराब होते हैं। और ये भी सोच लो - जो लोग public में इतना प्यार जताते हैं, जरूरी नहीं वो हर वक्त मज़े में हों। असली intimacy तो private में होती है जहां दोनों बिना किसी शर्म के natural हों। तुम्हें ये orgasm और dopamine का भूत सवार करने की जरूरत नहीं है। naturally हो जाए तो ठीक है, पर इसके बिना भी life का मज़ा ले सकते हो।
कई लोग जब porn को pleasure से अलग कर देते हैं तो सोचते हैं “काश कोई clean porn होती।” Soft porn तो है, पर जो भी try करता है वो समझ जाता है - एकदम बकवास है। एक बात समझ लो - तुम सिर्फ dopamine के लिए porn देख रहे थे। एक बार ये craving खत्म हो गई तो इस online कोठे की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
चाहे ये बेचेनी dopamine की कमी से आएं या फिर किसी trigger से, उनको normal समझो। Physical दर्द वगैरह कुछ नहीं होता और अगर दिमाग सही जगह पे है तो ये कोई tension वाली बात नहीं है। Withdrawal को लेकर ज्यादा परेशान मत हो - ये feeling इतनी बुरी नहीं होती। असली problem तब शुरू होती है जब तुम सोचते हो ‘अरे यार, मैं चाहता हूं पर ले नहीं सकता’। रोने-धोने की बजाय खुद से बोलो: “अरे ये तो वही porn का withdrawal है। सारे users की यही झंझट है जो उन्हें addict बनाए रखती है। जो नहीं देखते उन्हें ये नहीं झेलना पड़ता। कितनी मस्त बात है कि मैं इस toxic चीज़ से दूर हो रहा हूं!”
तीन हफ्ते थोड़ी दिक्कत आएगी body में, लेकिन इस time में और आगे की life में कुछ धमाकेदार हो रहा होगा। तुम एक गंदी बीमारी से पीछा छुड़ा रहे हो। इस छोटी सी परेशानी के बदले इतने फायदे हैं कि तुम withdrawal को भी enjoy करने लगोगे। ये एक मज़ेदार game बन जाएगा - जैसे तुम अपने अंदर बैठे porn के कीड़े को भूखा मार रहे हो। बस तीन हफ्ते उसे भूखा रखना है जब वो तुम्हें फुसलाने की कोशिश करेगा।
कभी वो तुम्हें sad करने की कोशिश करेगा। कभी तुम चोकन्ने नहीं होगे। कोई porn का link भेज देगा या online कुछ अजीब दिख जाएगा और तुम भूल जाओगे कि छोड़ दिया है। याद आने पर लगेगा कि कुछ miss कर रहे हो। इन सब चालों के लिए तैयार रहो, और जब भी मन करे, याद रखो ये सिर्फ इसलिए है क्योंकि तुम्हारे अंदर एक शैतान बैठा है और हर बार जब तुम इस इच्छा को ignore करते हो, तुम उस शैतान को एक झटका दे रहे हो।
Porn को भूलने की कोशिश मत करना। PMO करने वाले जो willpower से छोड़ने की कोशिश करते हैं, वो इसी चक्कर में घंटों depression में रहते हैं। हर दिन यही सोचते रहते हैं कि कब भूल जाएंगे। बिल्कुल नींद की तरह - जितना ज्यादा tension लोगे, उतना ही मुश्किल हो जाएगा। सच बताऊं तो तुम भूल भी नहीं पाओगे, पहले कुछ दिन वो ‘छोटा शैतान’ तुम्हें याद दिलाता रहेगा और तुम टाल नहीं पाओगे। जब तक laptop, smartphone, और magazines आस-पास हैं, ये reminders आते रहेंगे।
Point है कि भूलने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि कुछ बुरा हो ही नहीं रहा है। असल में तो कुछ बहुत मस्त और धमाकेदार हो रहा है। चाहे दिन में हज़ार बार सोचो, हर पल का मज़ा लो, खुद को याद दिलाओ कि कितनी सुपर फीलिंग है फिर से free होने की। सोचो कितनी राहत है कि अब खुद को torture नहीं करना पड़ेगा। और जैसा पहले बताया, तुम देखोगे कि ये बेचैनी भी मजदार लगेगीे, और फिर तुम्हें खुद हैरानी होगी कि porn को भूलने में कितना कम time लगा।
सबसे important बात - अपने decision पे doubt मत करो। एक बार doubt आया नहीं कि तुम रोने-धोने लगोगे, और चीज़ें और खराब होती जाएंगी। इसकी जगह उस sad moment को एक boost में convert करो। अगर depression की वजह से ऐसा लग रहा है, तो याद करो कि porn ही इसकी वजह थी। अगर कोई दोस्त porn का link भेजे, तो proudly बोलो, “भाई अब इस चीज़ की जरूरत नहीं है मुझे।” उन्हें थोड़ा बुरा लगेगा, लेकिन जब देखेंगे कि तुम्हें फर्क नहीं पड़ता, तो वो भी छोड़ने के बारे में सोचने लगेंगे।
याद रखो: तुम्हारे पास पहले से ही बहुत strong reasons हैं छोड़ने के। अपने आप को याद दिलाओ कि कितना नुकसान हो रहा था और सोचो क्या सच में तुम अपनी body और mind को खतरे में डालना चाहते हो। और सबसे बड़ी बात - क्या पूरी life एक शाप के साथ जीना चाहते हो? उस छोटे शैतान की चाल को समझो जो हर नुकसान को छोटा दिखाने की कोशिश करता है। और सबसे important, याद रखो ये feeling temporary है, और हर पल तुम्हें अपने goal के और करीब ले जा रहा है।
कुछ users डरते हैं कि उन्हें पूरी ज़िंदगी ‘automatic triggers’ से लड़ना पड़ेगा। मतलब उन्हें लगता है कि पूरी life psychology का सहारा लेकर खुद को झूठ बोलना पड़ेगा कि उन्हें porn की जरूरत नहीं है। ऐसा नहीं है! देखो, optimist glass को आधा भरा देखता है और pessimist आधा खाला। लेकिन porn के मामले में, glass एकदम खाली है और user उसे भरा समझ रहा है। Internet porn में कोई फायदा नहीं है। बस user का दिमाग brainwash हो गया है कि फायदे हैं। जब तुम खुद से कहना शुरू करोगे कि तुम्हें porn की न जरूरत है न चाहत, तो कुछ time में तुम्हें ये कहने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी - तुम खुद सच्चाई देख लोगे। बस porn ज़िंदगी की आखिरी priority है - और इस आखिरी priority को कभी नहीं करना है